महापाषाण काल

महापाषाण काल 

नवपाषाण युग की समाप्ति के बाद दक्षिण में जिस संस्कृति का उदय हुआ, उसे महापाषाण काल कहा जाता है। पत्थर की कब्रों को 'महापाषाण' कहा जाता था। इन कब्रों में मानवों को दफनाया जाता था। महापाषाण काल से संबद्ध लोग साधारणतः पहाड़ों की ढलान पर रहते थे। दक्कन, दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्वी भारत तथा कश्मीर में यह प्रथा प्रचलित थी। यहाँ की कब्रों में लोहे के औज़ार, घोड़े के कंकाल तथा पत्थर एवं सोने के गहने भी प्राप्त हुए हैं। महापाषाण काल में आंशिक शवाधान की पद्धति भी प्रचलित थी जिसके तहत शवों को जंगली जानवरों के खाने के लिये छोड़ दिया जाता था। ब्रह्मगिरि, आदिचन्नलूर, मास्की, चिंगलपत्तु, नागार्जुनकोंडा आदि इसके प्रमुख शवाधान केंद्र हैं। महापाषाणकालीन लोग धान के अतिरिक्त रागी की खेती भी करते थे। इतिहासकारों ने महापाषाण काल का निर्धारण 1000 ई. पू. से लेकर प्रथम शताब्दी ई. पू. के बीच किया है। 

टिप्पणियाँ

popular post

मछलिObjective question and answer

आविन्यों 10th class objective question and answer

पर्यायवाची शब्द Hindi grammar

परम्परा का मूल्यांकन 10th class Hindi Objective Question and answer

आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

नौवतखाने में इबादत 10th class Hindi Objective question and answer

आर्मी वॉर कॉलेज, महू ने अपनी स्वर्ण जयंती मनाई

भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy)-

अवतल दर्पण का उपयोग physics